Book Creator

नदियाँ चले,चले समय की धारा

by Avantika Rathore

Cover

Loading...
Loading...
नदियाँ चले,चले समय की धारा 
Loading...
द्वारा - अवंतिका राठौर (कक्षा ८थ- फ)
नदियाँ टाइम-मशीन जैसी होती है | 
अगर कोई किसी नदी में कूद जाये और तैरता हुआ अतीत में पीछे 
खूब दूर चला जाये तो उसे बीता इतिहास जीवंत दखेगा।
कोई दो नदियाँ एक सरीखी नहीं होतीं। समय और जगह के हिसाब से उनकी भाव-भंगिमा बदलती रहती है।
कुछ नदियाँ सर्दियों में शांत होती हैं।
कुछ नदियाँ गर्मियों में सिमटी और लजीली होती हैं।
कुछ नदियाँ बरसात में गुस्से से उफनने लगती हैं।
नदी गेहुँई, साँवली, काली, नीली, हरी या कई अन्य रंगों की हो सकती है। वे अपने आस-पास के परिवेष और उनके भीतर धुली और छुपी चीज़ों के हिसाब से रंग बदलती हैं।
कभी तो नदी का रंग उसकी तली के पत्थरों का रंग ही होता है, तो कभी उसका रंग ऊपर छाए आसमान सरीखा होता है। नदियाँ अपना रास्ता भी बदलती हैं। सो अगर कोई नदी पहले कभी किसी जगह से गुज़रती रही हो, तो हो सकता है कि भविष्य में वह कभी किसी दूसरे स्थान से गुज़रने लगे।
गंगा जैसी कई नदियाँ हज़ारों बरस पुरानी हैं। उन्होंने मनुष्य जाति को बढ़ते हुए देखा है। लोगों को हमेशा से नदियों के पास रहना और काम करना भाया है। नदियाँ लोगों की देखभाल करना जानती हैं।
PrevNext