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नदियाँ चले,चले समय की धारा

by Avantika Rathore

Pages 2 and 3 of 24

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नदियाँ टाइम-मशीन जैसी होती है | 
अगर कोई किसी नदी में कूद जाये और तैरता हुआ अतीत में पीछे 
खूब दूर चला जाये तो उसे बीता इतिहास जीवंत दखेगा।
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कोई दो नदियाँ एक सरीखी नहीं होतीं। समय और जगह के हिसाब से उनकी भाव-भंगिमा बदलती रहती है।
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कुछ नदियाँ सर्दियों में शांत होती हैं।
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कुछ नदियाँ गर्मियों में सिमटी और लजीली होती हैं।
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कुछ नदियाँ बरसात में गुस्से से उफनने लगती हैं।