Laalii's One Day - Sindhi

by Vidya Nahar

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लाली जो हिक डिंहं
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लेखन : विद्या नाहर
चित्रांकन : मेरिलिन थॉमस कॅडेंटॉट
अनुवाद - निवेदन : बिंदु मंगतानी
प्रकाशन : बालोद्यान
गा्ड़े रंग जी हिक पतंग हुई लाली,
पुछ हुई जहिंजी अछी निराली |
उड़ामी वही हूअ ऊँचाई ते हिक डिंहं जडॅहि,
मिलियस ऊते हुन खे ब् पखी तडॅहि |
दिठईं आकाश में टे बादल |
थिया सवार, शुरु कयँऊ टैहल |
चार लंबा वण् बीठा हुआ अगि्याँ,
बरसात आई मथाँ जडॅहि बादल बरस्याँ |
पंज बारन कयूंँ पे रांद बॉल सां,
थी विया सभई आला बरसात सां|
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